Monday, August 5, 2019

Ichchha shakti

   


     इच्छा शक्ति


सेना में दम था पहले भी
मगर कहाँ पर कमी रही

इच्छा शक्ति कुछ लोगों की
जाने कहाँ पर जमी रही

सत्ता के लोभी नेता थे
फकत मलाई खाते थे

सेना,सैनिक के साहस को
हर बारी ही गिराते थे

100 रुपये अनुदान मे से भी
90 खुद खा जाते थे

आज कोई आया दमदार तो
पड़ गए खाब खटाई में

सीधे सीधे रेड पड़ी थी
काली जमा कमाई में

No comments:

मेरे हुजरे में कभी आओ अदब का चाँद रखता हूँ होशलों की दीवारें और छान रखता हूँ सेज मखमल की मुनासिब न हो शायद टूटी खटिया है मगर सम्मान ...