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Singhon pe bhi padti bhari hai

"Singhon pe bhi padti bhari hai" 

HOLI SPECAIL

येsss गौरे -गौरे गालन  की
दो चार बरस लगे “प्यारी” है
सिंहों पे भी पड़ती भारी है

शादी को शिकंजो जो कस जावे
लेवो समझ शिकारी फंस जावे
गन्ना को सो जूस निकस जावे
भुगते ता उम्र लाचारी है
सिंहों पे भी पड़ती भारी है
खानो पिनों दुष्वार करें
ये रात दिना तकरार करें
बिन लड़े ना इन को चैन पड़े
लड़े जैसे सांड सरकारी हैं
सिंहों पे भी पड़ती भारी है

एक रात में बी ए करवादै
माँ बाप से पल में लड़वादे
भाई भाई में बिगड़ वादे
करे छाती पे बैठ संवारी है
सिंहों पे भी पड़ती भारी है

देखन में भोली गैया हैं
ये थानेदार की भी मैया हैं
कोई बिरचो हुओ ततैया हैं
चिक चिक की बड़ी बिमारी हैं
सिंहों पे भी पड़ती भारी है

नाय मनो इनकी तो मरनो
जो माने तो जिन्दो बरनो
आफत को बड़ो भारी झरनो
कोई दबी हुई चिंगारी हैं
सिंहों पे भी पड़ती भारी है

मूरख हैं जो इन्हें समझावै
नाय समझ की बात समझ आवै
नाय इन से पार कोई पावे
सब झूटी लम्बड़दारी है
सिंहों पे भी पड़ती भारी है

हम ने भी राड जगा दिनी
नारी की महिमा सुना दिनी
सावन साँची बतला दिनी
शायद  कम्बख्ती आरी हैं
सिंहों पे भी पड़ती भारी है

सावन चौहान कारौली -एक कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान

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कविता - किसका गुमान करे

कविता- किसका गुमान करे
किसका ‘गुमान’ करे , काहे ‘अभिमान’ करे । ‘पैसा और सत्ता’ बंधू , आनी जानी चीज है ।
पैसा ना जो कर पाये , काम वो ये कर लाए । ‘मुश्कान छोटी’ बड़े , काम की चीज़ है ।
‘सत्य’ का ‘व्यवहार’ कर, बातें तु विचार कर । ‘अच्छाई बुराई’ साथ , जाने वाली चीज है ।
‘आचरण’ को साफ रख, मन में ना ‘पाप’ रख । ‘माफ करना’ बड़ा , बनाने वाली चीज़ है ।
‘संस्कार’ छोड़ मत, रस्मों को तोड़ मत । ‘रीति और रिवाज’ भी, ‘निभाने’ वाली चीज हैं ।
‘गाँठ’ मन की खोल ले, बोल ‘मीठे’ बोल ले । ‘झगड़ा  लड़ाई’ तो, ‘मिटाने’ वाली चीज़ हैं ।
‘नेक काम’ कर ले , उसको सुमरले । ‘वक़्त’ लोट कर नहीं , आने वाली चीज़ है ।
थोडा सा ‘नरम’ बन, छोड़ दे ‘क्रोध अगन’ । ‘सब्र’ भी तो सावन, ‘आजमाने’ वाली चीज़ है ।
कवि- “सावन चौहान कारौली” भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534



Ichchha shakti

इच्छा शक्ति


सेना में दम था पहले भी
मगर कहाँ पर कमी रही
इच्छा शक्ति कुछ लोगों की
जाने कहाँ पर जमी रही
सत्ता के लोभी नेता थे
फकत मलाई खाते थे
सेना,सैनिक के साहस को
हर बारी ही गिराते थे
100 रुपये अनुदान मे से भी
90 खुद खा जाते थे
आज कोई आया दमदार तो
पड़ गए खाब खटाई में
सीधे सीधे रेड पड़ी थी
काली जमा कमाई में
सावन चौहान करोली

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