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Sabar ka fal mitha hota hai

    Ek  haryanvi ragni


सबर का फल मीठा होता है

सबर का फळ मीठा होता है सज्जन लोग बताते हैं
बेसब्री इंसान हमेशा बहोत घणे दुख पाते हैं

सबर करया था भीलनी ने श्री राम थे एक दिन आयेे
बड़े प्यार ते बैठ कुटी में झूठे बेर भी खाये
सबर रहया ना केकई के जिसने दसरथ मरवाये
राम लखन सीता माता महलां तै कढवाये-2
राणी तै बणी माणस खाणी  श्री बाल्मीकि बतलाते है
बेसब्री इंसान...

सबर करया था ध्रुव भगत ने पकड़ गौद ते तारा था
सौतेली माता सुरुचि ने बिना दोष फटकारा था
पाँच साल के बालक आगे इंद्रदेव भी हारा था
श्री हरी ने गौद में लेके उसका सिर पुचकारा था
उत्तानपात राजा ते जाके देवऋषि बतलाते हैं
बेसब्री इंसान हमेशा…

सबर करया था मीरा ने राणा के जुल्म थे झेले
सबर करया पहलाद भक्त ने रोज मौत संग खेले
मीरा बाई नाम लिखागी नटवर नागर गैले
बरदानी थी खूब होलिका जली पहलाद से पहले
हिरणाकुश का पाप मिटाणे नरसिंह
बनके आते हैं
बेसब्री इंसान हमेशा…

धीरे धीरे बढ़ै लता भाई चढ़जा ठेट शिखर में
साहूकार कदे मोटा ना होता रहता सोच फ़िकर में
घी का हलुवा जीब जलादे जल्दी के चक्कर में
सावन सुखी रह वो माणस जो राखे नीत सबर में
सबते मिठे फल वो होते पेड़ पे जो पकजाते हैं
बेसब्री इंसान हमेशा बहुत घणे दुखपाते है
सबर का फल मीठा होता है सज्जन लोग बताते


सावन चौहान कारौली -एक नादान कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो. 9636931534
https://www.writersindia.in/?m=1


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Ichchha shakti

इच्छा शक्ति


सेना में दम था पहले भी
मगर कहाँ पर कमी रही
इच्छा शक्ति कुछ लोगों की
जाने कहाँ पर जमी रही
सत्ता के लोभी नेता थे
फकत मलाई खाते थे
सेना,सैनिक के साहस को
हर बारी ही गिराते थे
100 रुपये अनुदान मे से भी
90 खुद खा जाते थे
आज कोई आया दमदार तो
पड़ गए खाब खटाई में
सीधे सीधे रेड पड़ी थी
काली जमा कमाई में
सावन चौहान करोली

https://www.writersindia.in/2019/07/fouji-vatan-ki-shan-hai-fouji.html?m=1

कविता - किसका गुमान करे

कविता- किसका गुमान करे
किसका ‘गुमान’ करे , काहे ‘अभिमान’ करे । ‘पैसा और सत्ता’ बंधू , आनी जानी चीज है ।
पैसा ना जो कर पाये , काम वो ये कर लाए । ‘मुश्कान छोटी’ बड़े , काम की चीज़ है ।
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‘आचरण’ को साफ रख, मन में ना ‘पाप’ रख । ‘माफ करना’ बड़ा , बनाने वाली चीज़ है ।
‘संस्कार’ छोड़ मत, रस्मों को तोड़ मत । ‘रीति और रिवाज’ भी, ‘निभाने’ वाली चीज हैं ।
‘गाँठ’ मन की खोल ले, बोल ‘मीठे’ बोल ले । ‘झगड़ा  लड़ाई’ तो, ‘मिटाने’ वाली चीज़ हैं ।
‘नेक काम’ कर ले , उसको सुमरले । ‘वक़्त’ लोट कर नहीं , आने वाली चीज़ है ।
थोडा सा ‘नरम’ बन, छोड़ दे ‘क्रोध अगन’ । ‘सब्र’ भी तो सावन, ‘आजमाने’ वाली चीज़ है ।
कवि- “सावन चौहान कारौली” भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534



भूरा बैल

भूरा बैल

एक बैल की जोड़ी जिसमें, भूरा बैल हमारा था । छोटा सा धरती का टुकड़ा, जो बस मात्र सहारा था ।।
एक छप्पर मिटटी का बना थ, जिसकी छान पुरानी थी । बारिस में बुँदे गिरती थी, आसमान से पानी की । याद मुझे वो दौर ना भूला, कैसे वक़्त गुजारा था ।। एक बैल… रात दिना मेहनत कर के, माँ पापा फसल उगाते थे । काट पिट कर खेत के पैर में, बैलों से उसे गहाते थे , ज्यादा तो बनिया ले जाता, जो बच जाता हमारा था ।। एक बैल… , छ: महीने मुश्किल था निकलना, काम नहीं चल पाता था । लेते ओर किसी से उधार, वो कोई शर्त बताता था । क्या करते पापा बेचारे, और ना कोई चारा था ।। एक बैल…
उपर के खर्चे थे और भी, मात पिता ने था पाला । बीमारी और शादी ब्याह में, सिर्फ सहारा था लाला । सावन वो दिन भी देखा जब, बैल हमारा हारा था ।। एक बैल की जोड़ी …
छोटा सा धरती का टुकड़ा, जो बस मात्र सहारा था ।।
“सावन चौहान कारोली“ एक कलमकार अ0 भा0 सा0परिषद भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534

https://www.writersindia.in/2019/07/chashka-bura-sharab-ka.html