Wednesday, July 3, 2019

लिखने की लत प्यारी सी

कविता
****************************************************************

जाने किसको क्या दे डाला ,
लीला उस गिरधारी की ।
गन्ने में इतना मधुरस है,
और अश्रु बूँद है खारी सी ।

कैसे कैसे जीव बनाये ,
रूप रंग सबका न्यारा ।
कोवे को बदरंग बनाया,  
बना मोर कितना प्यारा ।  

चींटी कितनी हल्की बना दी,
हाथी को काया भारी दी
गन्ने में कितना मधुरस है,
और अश्रु बूँद है खारी सी ।

कोयल को आवाज सुरीली,
हंस को सुन्दर काया दी ।
निर्धन को कंगाली दे दी,
धनवानों को माया दी ।

साधु को संन्यास दिया ,
और ग्रस्थ को जीम्मेदारी दी ।
गन्ने में कितना मधुरस है ,
और अश्रु बूँद है खारी सी ।

कृपण को कंजूसी दे दी,
दानी को बड़े भाव दिये ।
विद्वानों को दिया ज्ञान,
और पहलवान को दाव दीये।

कहीं धन दौलत के ढ़ेर पड़े,
कहीं भूख प्यास लाचारी दी ।
गन्ने में कितना मधुरस है,
और अश्रु बूँद है खारी सी ।

पेड़ को सुदृढ़ तना दिया,
लचक लता को प्यारी दी ।
फूलों में रंग खूब भरा,
पत्तों की कतरन न्यारी सी।

सावन को दी कलम सांवरिया,
दी लिखने की लत प्यारी सी ।
जाने किसको क्या दे डाला,
लीला उस गिरधारी की ।
गन्ने में कितना मधुरस है,
और अश्रु बूँद है खारी सी ।

**************************************************
“सावन चौहन कारौली” एक रचनाकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो.9636931534

2 comments:

Kuldeep Singh Bandikui said...

Nice

geet gajal said...

बहुत बहुत शुक्रिया स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए

मेरे हुजरे में कभी आओ अदब का चाँद रखता हूँ होशलों की दीवारें और छान रखता हूँ सेज मखमल की मुनासिब न हो शायद टूटी खटिया है मगर सम्मान ...