Friday, July 19, 2019

मुफलिस की छत



मुफलिस की छत
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थोड़ी कसक, थोडा दर्द और अहसास लिखूंगा ।
कलमकार हूँ कच्चे पक्के से जसबात लिखूंगा  ।।
फूलों के रंग रूप और खुशबू का आशिक हूँ ।
मैं खारों को भी कोमल दिल के पास लिखूंगा ।।

हैं हुश्न, इश्क,अदा,उम्र पे तो; लिखते सब ।
मैं बिछुड़ने के बाद के भी हालात लिखूंगा ।।

देशभक्ति सैनिकों की उनके शौर्य की गाथा ।
उस शहीद की बीवी के भी ख्यालात लिखूंगा ।।
 
मौशम की मस्त बहारें मुझको भी है पसंद ।
मुफ़लिस की छत से टपकती बरसात लिखूँगा ।।

रोड़ा है तरक्की की राह में ये जात-पात ।
मैं महज इसको चुनावी बिसात लिखूंगा ।।

करते है कितने वादे ये दौर-ए-चुनाव में ।
नेताओं की मैं असली वाली जात लिखूंगा ।।

वो छीन भी सकते है सावन कलम हाँथ से ।
लेकिन मैं हक आवाम की हर बात लिखूंगा ।।
  
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 "सावन चौहान कारौली" एक नादान कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो.9636931534

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