Thursday, July 18, 2019

अधूरी प्यास




अधूरी प्यास


कुत्ते बिल्ली पाल रहे हो
इंसानों से दुरी क्यों

सबको एक मालिक ने बनाया
मजहब की मजबूरी क्यों

कितने घर बर्बाद किये है
इस दारू की बोतल ने

जो इज्जत मिटी में मिलादे
ऐसा काम जरुरी क्यों

मन सुंदर है गर इंसान का
रूप रंग से क्या लेना

चमड़ी तो चमड़ी है प्यारे
फिर काली और भूरी क्यों

धन दौलत का ढेर है फिर भी
मारा मारा फिरता है

साहूकारों की है जाने
फिर भी प्यास अधूरी क्यों

ऊँचे ऊँचे ओहदे वाले
बोल रहे नीचा कितना

ऐसे लोगों की है सावन
संसद में मंजूरी क्यों

कुत्ते बिल्ली पाल रहे हो
इंसानों से दुरी क्यों

सबको एक मालिक ने बनाया
मजहब की मजबूरी क्यों

“सावन चौहान कारौली” एक कलमकार
भिवाडी अलवर राजस्थान
https://www.writersindia.in/2019/07/blog-post_6.html

https://www.writersindia.in/2019/07/chashka-bura-sharab-ka.html

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