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मौसम ये भीगा भीगा सा

Maosam

इक तेरी आरजू में ज़िंदा था अब तलक,
तू आया नहीं और मैं जीते जी मर गया।

मौसम ये भीगा भीगा सा शोलों को हवा देता है ।
यादों का झोका आता है, हंसतों को रुला देता है ।।

ये बदली काली काली सी, सिने में आग लगाती है ।
ये ठंडी ठंडी बूँदें भी चिंगारी सी भड़काती हैं ।
उसपे ये कूकना कोयल का मेरे दिल को दहला देता है ।।
मौसम ये भीगा भीगा…

कभी बनती नहीं उजालों से, अंधेरों से याराना है ।
मुझे महफिल रास नहीं आती, कुछ ऐसा मेरा फ़साना हैं
संज धज के सितारों का आना, मेरी नींद उड़ा देता है ।।
मौसम ये भीगा भीगा  …

तकदीर बनाने वाले ये, तूने ऐसा खेल रचाया क्यों ।
गर लिखी जुदाई किसमत में, फेर तूने ये मेल मिलाया क्यों ।
फूलों पे भ्रमर का मंडराना, एक दर्द जगा देता है ।
मौसम ये भीगा भीगा…

सदियों से रहती आई है, दुनियां दुश्मन दीवानों की ।
जलना ही क्यों हैं किसमत में, इन आशिक इन परवानों की ।
जब आये बहारें  बागों में, कोई अश्क बहा देता है ।।
मौसम ये भीगा भीगा…

हालत देखी नहीं जाती है, सावन इन बहती  आखों की ।
बस डोरी टूटने वाली है, मेरी इन उखड़ती सांसों की ।
पत्थर भी पिंघल जाये सुन कर, दिल ऐसी सदा देता है
मौसम ये भीगा भीगा …

“सावन चौहान करौली” एक कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो.9636931534

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कविता - किसका गुमान करे

कविता- किसका गुमान करे
किसका ‘गुमान’ करे , काहे ‘अभिमान’ करे । ‘पैसा और सत्ता’ बंधू , आनी जानी चीज है ।
पैसा ना जो कर पाये , काम वो ये कर लाए । ‘मुश्कान छोटी’ बड़े , काम की चीज़ है ।
‘सत्य’ का ‘व्यवहार’ कर, बातें तु विचार कर । ‘अच्छाई बुराई’ साथ , जाने वाली चीज है ।
‘आचरण’ को साफ रख, मन में ना ‘पाप’ रख । ‘माफ करना’ बड़ा , बनाने वाली चीज़ है ।
‘संस्कार’ छोड़ मत, रस्मों को तोड़ मत । ‘रीति और रिवाज’ भी, ‘निभाने’ वाली चीज हैं ।
‘गाँठ’ मन की खोल ले, बोल ‘मीठे’ बोल ले । ‘झगड़ा  लड़ाई’ तो, ‘मिटाने’ वाली चीज़ हैं ।
‘नेक काम’ कर ले , उसको सुमरले । ‘वक़्त’ लोट कर नहीं , आने वाली चीज़ है ।
थोडा सा ‘नरम’ बन, छोड़ दे ‘क्रोध अगन’ । ‘सब्र’ भी तो सावन, ‘आजमाने’ वाली चीज़ है ।
कवि- “सावन चौहान कारौली” भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534



Ichchha shakti

इच्छा शक्ति


सेना में दम था पहले भी
मगर कहाँ पर कमी रही
इच्छा शक्ति कुछ लोगों की
जाने कहाँ पर जमी रही
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फकत मलाई खाते थे
सेना,सैनिक के साहस को
हर बारी ही गिराते थे
100 रुपये अनुदान मे से भी
90 खुद खा जाते थे
आज कोई आया दमदार तो
पड़ गए खाब खटाई में
सीधे सीधे रेड पड़ी थी
काली जमा कमाई में
सावन चौहान करोली

https://www.writersindia.in/2019/07/fouji-vatan-ki-shan-hai-fouji.html?m=1

गुरु महिमा

शिक्षक दिवस के पावन पर्व पर मेरी लेखनी गुरू चरण में... गुरु वंदना

गुरू ब्रह्मा गुरू श्री हरी,     गुरू है भोले नाथ ।       शीश सदा गुरू चरण नवे,          छ रुत बारह मास ।। गुरू की जो सेवा करे,     वो नर है बड़भागी ।          जो आदेश पालन करे,             उसकी किस्मत जागी ।।     गुरू बिना संसार ये,    होता नरक सामान ।        गुरू नाम के पुष्प से,            है गुलशन में जान ।। सारी विपदा शिष्य की,       अपने सर गुरू लेय ।          जीवन के हर कॉलम में,               ज्ञान सुधा भर देय ।। गुरू चांदनी रात है,    गुरू सुहानी भोर ।           जीवन एक पतंग है,              गुरू है उसकी डोर ।।          गुरू चरण जिसको मिले,     हो जाए भव से पार ।         गुरू चरणों की रज पाके,             हो जाए उद्धार ।। गुरू जगाता चेतना,   गुरू दिखता राह ।     उसका जीवन सफल है,           गुरू की जिसपे निगाह ।। गुरू ज्ञान की नाव में,     मिले जिसे स्थान ।          उसको तीनों लोकों में,               मिलता है सम्मान ।। गुरू दिशा गुरू रोशनी,      गुरू गुणों की खान ।          सावन सतगुरू मिल जावें,             मिल जावें भगवा…