Wednesday, July 17, 2019

मौसम ये भीगा भीगा सा

Maosam

इक तेरी आरजू में ज़िंदा था अब तलक,
तू आया नहीं और मैं जीते जी मर गया।

मौसम ये भीगा भीगा सा शोलों को हवा देता है ।
यादों का झोका आता है, हंसतों को रुला देता है ।।

ये बदली काली काली सी, सिने में आग लगाती है ।
ये ठंडी ठंडी बूँदें भी चिंगारी सी भड़काती हैं ।
उसपे ये कूकना कोयल का मेरे दिल को दहला देता है ।।
मौसम ये भीगा भीगा…

कभी बनती नहीं उजालों से, अंधेरों से याराना है ।
मुझे महफिल रास नहीं आती, कुछ ऐसा मेरा फ़साना हैं
संज धज के सितारों का आना, मेरी नींद उड़ा देता है ।।
मौसम ये भीगा भीगा  …

तकदीर बनाने वाले ये, तूने ऐसा खेल रचाया क्यों ।
गर लिखी जुदाई किसमत में, फेर तूने ये मेल मिलाया क्यों ।
फूलों पे भ्रमर का मंडराना, एक दर्द जगा देता है ।
मौसम ये भीगा भीगा…

सदियों से रहती आई है, दुनियां दुश्मन दीवानों की ।
जलना ही क्यों हैं किसमत में, इन आशिक इन परवानों की ।
जब आये बहारें  बागों में, कोई अश्क बहा देता है ।।
मौसम ये भीगा भीगा…

हालत देखी नहीं जाती है, सावन इन बहती  आखों की ।
बस डोरी टूटने वाली है, मेरी इन उखड़ती सांसों की ।
पत्थर भी पिंघल जाये सुन कर, दिल ऐसी सदा देता है
मौसम ये भीगा भीगा …

“सावन चौहान करौली” एक कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो.9636931534

Meri Lekhni kalam

लेखनी कलम प्रचंड तेज सूरज सा इसमें । कलम उगलती है शोले ।। दिल की पीर शब्द बन जाती । फिर जो काव्य रंग घोले ।। फूल...