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Mathura vrindavan



रे मन निर्मल पावन हो जा


रे मन निर्मल, पावन हो जा,
सबका तु मन भावन हो जा ।
आगे बढ़ तु ,अतीत भूल कर ,

  1. मथुरा और वृन्दावन हो जा ।


कुछ चीज़े मोह लेंगी तुझको ,
कुछ बातें छोलेंगी तुझको ।
यहीं उलझ तू, मत रह जाना ,
सरस तपस्वी का तन हो जा ।


तु बन जा, एक अथाह समुन्दर,
सब कुछ तू ले ले खुद अंदर ।
सबके लिये हो जा सुखदायक ,
तु काऊ पेड़ की छावन हो जा ।


झूठे झमेले छोड़ दे सारे ,
इत उत मत भटके मेरे प्यारे ।
स्नेह प्रेम उपजा खुद अंदर,
फूलों वाला दामन हो जा।


सब तेरे है तू सबका बन ,
शील,विनय ,आदर शृद्धा बन ।
बड़ों का कर मेरे मन सम्मान,
समदर्शी तू ऐ सावन हो जा ।


“सावन चौहान कारौली”  एक नादान कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो.9636931534

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कविता - किसका गुमान करे

कविता- किसका गुमान करे
किसका ‘गुमान’ करे , काहे ‘अभिमान’ करे । ‘पैसा और सत्ता’ बंधू , आनी जानी चीज है ।
पैसा ना जो कर पाये , काम वो ये कर लाए । ‘मुश्कान छोटी’ बड़े , काम की चीज़ है ।
‘सत्य’ का ‘व्यवहार’ कर, बातें तु विचार कर । ‘अच्छाई बुराई’ साथ , जाने वाली चीज है ।
‘आचरण’ को साफ रख, मन में ना ‘पाप’ रख । ‘माफ करना’ बड़ा , बनाने वाली चीज़ है ।
‘संस्कार’ छोड़ मत, रस्मों को तोड़ मत । ‘रीति और रिवाज’ भी, ‘निभाने’ वाली चीज हैं ।
‘गाँठ’ मन की खोल ले, बोल ‘मीठे’ बोल ले । ‘झगड़ा  लड़ाई’ तो, ‘मिटाने’ वाली चीज़ हैं ।
‘नेक काम’ कर ले , उसको सुमरले । ‘वक़्त’ लोट कर नहीं , आने वाली चीज़ है ।
थोडा सा ‘नरम’ बन, छोड़ दे ‘क्रोध अगन’ । ‘सब्र’ भी तो सावन, ‘आजमाने’ वाली चीज़ है ।
कवि- “सावन चौहान कारौली” भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534



Ichchha shakti

इच्छा शक्ति


सेना में दम था पहले भी
मगर कहाँ पर कमी रही
इच्छा शक्ति कुछ लोगों की
जाने कहाँ पर जमी रही
सत्ता के लोभी नेता थे
फकत मलाई खाते थे
सेना,सैनिक के साहस को
हर बारी ही गिराते थे
100 रुपये अनुदान मे से भी
90 खुद खा जाते थे
आज कोई आया दमदार तो
पड़ गए खाब खटाई में
सीधे सीधे रेड पड़ी थी
काली जमा कमाई में
सावन चौहान करोली

https://www.writersindia.in/2019/07/fouji-vatan-ki-shan-hai-fouji.html?m=1

गुरु महिमा

शिक्षक दिवस के पावन पर्व पर मेरी लेखनी गुरू चरण में... गुरु वंदना

गुरू ब्रह्मा गुरू श्री हरी,     गुरू है भोले नाथ ।       शीश सदा गुरू चरण नवे,          छ रुत बारह मास ।। गुरू की जो सेवा करे,     वो नर है बड़भागी ।          जो आदेश पालन करे,             उसकी किस्मत जागी ।।     गुरू बिना संसार ये,    होता नरक सामान ।        गुरू नाम के पुष्प से,            है गुलशन में जान ।। सारी विपदा शिष्य की,       अपने सर गुरू लेय ।          जीवन के हर कॉलम में,               ज्ञान सुधा भर देय ।। गुरू चांदनी रात है,    गुरू सुहानी भोर ।           जीवन एक पतंग है,              गुरू है उसकी डोर ।।          गुरू चरण जिसको मिले,     हो जाए भव से पार ।         गुरू चरणों की रज पाके,             हो जाए उद्धार ।। गुरू जगाता चेतना,   गुरू दिखता राह ।     उसका जीवन सफल है,           गुरू की जिसपे निगाह ।। गुरू ज्ञान की नाव में,     मिले जिसे स्थान ।          उसको तीनों लोकों में,               मिलता है सम्मान ।। गुरू दिशा गुरू रोशनी,      गुरू गुणों की खान ।          सावन सतगुरू मिल जावें,             मिल जावें भगवा…