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ye mamta ka samander hai


ममता का समंदर है


ये ममता का समन्दर है,
कलाई की जरूरत है ।
इसी से ही तो ये दुनियाँ,
घर आँगन खूबसुरत है ।


बनके जननी इसने रखा,
महीनों कोख में हमको ।-2
करे सम्मान हम इसका,
बताने की जरूरत है ?


ये बेटी है परी जैसी ,
जो पापा की दुलारी है
ये है अर्धांग्नी,जो जीवन सारा,
हम पे वारी है ।
बिना नारी के हस्ती हैतेरी ,
क्या आदमी बतला-2
अदब से पेश आ इससे,
अगर तुझमे शराफत है ।


ये ममता का समन्दर… ,
कलाई की जरूरत… ।


सता ना मान के अबला ,
ये दुर्गा है ये है ज्वाला ।
आह से लोह जलता है,
जला है जो नहीं सम्भला ।
तुझे गर याद है राखी का धागा वो पवित्र सा
तो रखना लाज तू उसकी जिसकी हकदार औरत है ।


ये ममता का समन्दर…


जहाँ नारी की पूजा हो, देवों का वास होता है ,
जहाँ इनपे जुलम होता, वहॉ पर नाश होता है ।
ये है लक्ष्मी,ये है काली,ये है वागेश्वरी माता ,
इन्ही के रहम से सावन, नाम है और शोहरत है ।


ये ममता का समन्दर…


सावन चौहान कारौली...✍एक कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान

मो. 9636931534

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कविता - किसका गुमान करे

कविता- किसका गुमान करे
किसका ‘गुमान’ करे , काहे ‘अभिमान’ करे । ‘पैसा और सत्ता’ बंधू , आनी जानी चीज है ।
पैसा ना जो कर पाये , काम वो ये कर लाए । ‘मुश्कान छोटी’ बड़े , काम की चीज़ है ।
‘सत्य’ का ‘व्यवहार’ कर, बातें तु विचार कर । ‘अच्छाई बुराई’ साथ , जाने वाली चीज है ।
‘आचरण’ को साफ रख, मन में ना ‘पाप’ रख । ‘माफ करना’ बड़ा , बनाने वाली चीज़ है ।
‘संस्कार’ छोड़ मत, रस्मों को तोड़ मत । ‘रीति और रिवाज’ भी, ‘निभाने’ वाली चीज हैं ।
‘गाँठ’ मन की खोल ले, बोल ‘मीठे’ बोल ले । ‘झगड़ा  लड़ाई’ तो, ‘मिटाने’ वाली चीज़ हैं ।
‘नेक काम’ कर ले , उसको सुमरले । ‘वक़्त’ लोट कर नहीं , आने वाली चीज़ है ।
थोडा सा ‘नरम’ बन, छोड़ दे ‘क्रोध अगन’ । ‘सब्र’ भी तो सावन, ‘आजमाने’ वाली चीज़ है ।
कवि- “सावन चौहान कारौली” भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534



Ichchha shakti

इच्छा शक्ति


सेना में दम था पहले भी
मगर कहाँ पर कमी रही
इच्छा शक्ति कुछ लोगों की
जाने कहाँ पर जमी रही
सत्ता के लोभी नेता थे
फकत मलाई खाते थे
सेना,सैनिक के साहस को
हर बारी ही गिराते थे
100 रुपये अनुदान मे से भी
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पड़ गए खाब खटाई में
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काली जमा कमाई में
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