Wednesday, June 19, 2019

The Secrecy raj ki baat

 सिक्रेसी
 राज की बात

2122 1221 2122 12

राज की बात है, बात ही राज है
बिन करे होती’ पैदा, इक आवाज है।

खुल्ली आँखों से कुछ भी, नजर आये ना
नैन मूंदे तो खुलते, नए राज है।

खाक से है बना, खाक हो जाएगा
गोरे तन पे तुझे इतना, क्यों नाज है।

ध्यान सांसों की सरगम पे, धर तो जरा
इतना प्यारा बजे ना, कोई साज है।

साथ आया न कोई, गया साथ मे
लेनी पड़ती अकेले ही, परवाज है।

कब गिरादे- ऊठादे, रजा वक्त की
वक्त के कुछ अलग से ही , अंदाज है।

हद से ज्यादा किसी पे न करना यकीं
धड़कने तक हो जाती दगा बाज है।


सावन चौहान कारोली

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