Tuesday, June 11, 2019

DIL KI BAAT

बैरन मंदी


अबके डँस गई बैरन मन्दी ,सब कुछ बंटाधार हुआ ।
जिससे जीवन चलता था, चोपट वो; कारोबार हुआ ।।

ऐसी मन्दी....

बच्चों की फरमाइश और शब्जी के भाव चिड़ाते है ।
तंगहाली पर्वत सी हुई है, और रुखा सुखा खाते है ।
भूख प्यास और नींद लगे ना जीना तक दुस्वार हुआ ।।

ऐसी मन्दी...

जो सच्चे साथी बनते थे, साथ सभी वो छोड़ गये ।
चहल पहल और हंसी मसकरी,जाने सब किस ओर गये ।
जो बाँहों में भरता था, वो "जालिम" साहूकार हुआ ।।

ऐसी मन्दी...

आने लगे तकाजे अब तो,घर पे  ही आसामी के ।
रोज ही बादल घिर आते है सर पे अब बदनामी के ।
सारी राहें बन्द हुई हैं अब के यूँ लाचार हुआ ।।

ऐसी मन्दी...

सारे रिश्ते नाते देखे, भाई देखे माँ जाये ।
समय ने ऐसा दृश्य दिखाया, सब कुछ लिखा नहीं जाये ।
नाजुक  इन हालातों में जज्बातों तक पे वार हुआ ।।

ऐसी मन्दी…

शुक्र करूँगा तेरा फिर भी, ऐ मालिक मेरे दाता ।
कैसे लिखता इन भावों को, ये दिन जो ना दिखलाता ।
वो समझे मेरे मन को सावन, कलम से जिसको प्यार हुआ ।।

ऐसी मन्दी…
जिससे जीवन...

“सावन चौहन कारौली” एक नादान कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान

मो. 9636931534

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