Tuesday, June 11, 2019

DESH BHAKT


देशभक्त-एक कविता


हुर्रियत को पनपाने वाले देशभक्त है
पाकिस्तान की गाने वाले देशभक्त है

गांधी जी ने बात कही थी कौनसे दल को मिटाने की
कौन वजहा थी नेता जी की जासूसी करवाने की
जबरन सत्ता पाने वाले देश भक्त है

हरि सिंह महाराज ने केशर क्यारी हमको सौंपी थी
कश्मीरी पण्डित की पीठ मे किसने कटारी घोपी थी
नरसँहार कराने वाले देश भक्त है

कौन था जिसने देश विरोधी लोगों को पनपाया था
कौन था जिसने गद्दारों को सुरक्षा कवच दिलाया था
पाकिस्तां मे छाने वाले देश भक्त है


दिल दुखता है JNU मे देश विरोधी नारों से
कोन लोग मिलने जाते हैं देश के उन गद्दारों से
बटवारा करवाने वाले देश भक्त है


चोट लगे अपने सैनिक को चैन से कैसे सोते है
आतंकी मारा जाए तो सरीखे जनाजा होते है
ये पत्थर बरसाने वाले देश भक्त है


देश रहा ना रहने लायक वापिस पदक लौटाते जो
जिस धरती ने सबको सींचा, असहिष्णु उसे बताते जो
ऐसा भ्रम फैलाने वाले देश भक्त है


संसद सामने संतों पे गोली किसने चलवाई थी
गौमाता के भक्तों की किसने लाशें बिछवाई थी
चौरासी करवाने वाले देश भक्त है


घोटाले बाजों ने मिल कर शौर् उठाया भारी है
हंस को घेर लिया कौओं ने सीरत सूरत कारी है
घास तलक खाजाने वाले देश भक्त है


सावन चौहान कारोली

No comments:

मेरे हुजरे में कभी आओ अदब का चाँद रखता हूँ होशलों की दीवारें और छान रखता हूँ सेज मखमल की मुनासिब न हो शायद टूटी खटिया है मगर सम्मान ...