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chhat pe aane lage aajkal



गज़ल


वज़्न -212 212 212 "जिंदगी की न टूटे लड़ी”


मुश्कुराने लगे आजकल दिल लुभाने लगे आजकल


फूल खुशबू चमन और कली दिल को भाने लगे आजकल


चाँद तारे धनक चाँदनी छत पे आने लगे आजकल


जब से दिल आशना हो गया वो सताने लगे आजकल


जिंदगी चाशनी होगई घुल के आने लगे आजकल


आग  दिल मे लगाके मेरे रुख छुपाने लगे आजकल


हाय जालिम ने क्या कर दिया याद आने लगे आजकल


इश्क का है असर देखिए सज के आने लगे आज कल


जब से हमसे निगाहें मिली सकपकाने लगे आजकल


जिसको एक पल सुहाते न थे उनको भाने लगे आजकल


शेर ‘सावन’ मुकम्मल हुआ वो जो गाने लगे आजकल


स्वरचित कलमकार-सावन चौहान कारोली अल्फ़ाज़ ए सुखन07-04-2019



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कविता - किसका गुमान करे

कविता- किसका गुमान करे
किसका ‘गुमान’ करे , काहे ‘अभिमान’ करे । ‘पैसा और सत्ता’ बंधू , आनी जानी चीज है ।
पैसा ना जो कर पाये , काम वो ये कर लाए । ‘मुश्कान छोटी’ बड़े , काम की चीज़ है ।
‘सत्य’ का ‘व्यवहार’ कर, बातें तु विचार कर । ‘अच्छाई बुराई’ साथ , जाने वाली चीज है ।
‘आचरण’ को साफ रख, मन में ना ‘पाप’ रख । ‘माफ करना’ बड़ा , बनाने वाली चीज़ है ।
‘संस्कार’ छोड़ मत, रस्मों को तोड़ मत । ‘रीति और रिवाज’ भी, ‘निभाने’ वाली चीज हैं ।
‘गाँठ’ मन की खोल ले, बोल ‘मीठे’ बोल ले । ‘झगड़ा  लड़ाई’ तो, ‘मिटाने’ वाली चीज़ हैं ।
‘नेक काम’ कर ले , उसको सुमरले । ‘वक़्त’ लोट कर नहीं , आने वाली चीज़ है ।
थोडा सा ‘नरम’ बन, छोड़ दे ‘क्रोध अगन’ । ‘सब्र’ भी तो सावन, ‘आजमाने’ वाली चीज़ है ।
कवि- “सावन चौहान कारौली” भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534



Ichchha shakti

इच्छा शक्ति


सेना में दम था पहले भी
मगर कहाँ पर कमी रही
इच्छा शक्ति कुछ लोगों की
जाने कहाँ पर जमी रही
सत्ता के लोभी नेता थे
फकत मलाई खाते थे
सेना,सैनिक के साहस को
हर बारी ही गिराते थे
100 रुपये अनुदान मे से भी
90 खुद खा जाते थे
आज कोई आया दमदार तो
पड़ गए खाब खटाई में
सीधे सीधे रेड पड़ी थी
काली जमा कमाई में
सावन चौहान करोली

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छोटा सा धरती का टुकड़ा, जो बस मात्र सहारा था ।।
“सावन चौहान कारोली“ एक कलमकार अ0 भा0 सा0परिषद भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534

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