Skip to main content

शारदे वंदना

हे शारदे माँ

हे शारदे माँ, हे वीणापाणि विद्या का मुझको भी वरदान दे दो ।

लिखने की सुमति देना भारती, रसना को मेरी भी 'स्वर- ज्ञान' दे दो ।।

श्रद्धा सुंगंधित 'पुहुप' चढ़ाऊं, 'दीप-धूप' से तुमको मनाऊँ ।

सुबह श्याम तेरी करूँ मैं वन्दना, काव्य शिखर का माँ 'सोपान' दे दो ।।

हे "शारदे" माँ...

कर 'पुस्तक' धरणी शतरूपा, ज्ञान,विवेक,सत्य स्वरूपा ।

सुर नर मुनि हृदय 'तम' हरणी, मेरी कलम को भी पहचान दे दो ।।

हे "शारदे" माँ...

'तिमिर'गहन माँ 'धवल' किरण दो, 'मन मृग'भटके वन में 'हिरण' सो ।।

'दास' बनालो ऐ हंसवाहणी, चरणों में आपने माँ 'स्थान' दे दो ।।

हे "शारदे" माँ...

वागेश्वरी माँ 'शील', 'शबर' दो, कर 'वरदायक' शीश पे धरदो ।।

दया,प्रेम हिय करुणा भरदो, बुद्धि, विवेक, समझ ज्ञान दे दो ।।

हे "शारदे" माँ...

ध्यावे 'तोहे देवगण'सारे, 'वेद-पुराण' हैं तेरे सवारे ।

तुम बिन 'ज्ञान' कोई ना पावे, मेरे विचारों को 'उत्थान' दे दो ।।

हे "शारदे" माँ...

हे पद्मासनि, हे शुभकरणी, तीनों लोक 'निर्बाध' विहरणी ।

"सावन" भी तेरी शरण में हैं मैया, हे माँ भवानी इधर 'ध्यान' दे दो ।।

हे माँ "शारदे", हे "वीणापाणि"…



“सावन चौहान कारौली ”- एक कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो.9636931534




Comments

Popular posts from this blog

कविता - किसका गुमान करे

कविता- किसका गुमान करे
किसका ‘गुमान’ करे , काहे ‘अभिमान’ करे । ‘पैसा और सत्ता’ बंधू , आनी जानी चीज है ।
पैसा ना जो कर पाये , काम वो ये कर लाए । ‘मुश्कान छोटी’ बड़े , काम की चीज़ है ।
‘सत्य’ का ‘व्यवहार’ कर, बातें तु विचार कर । ‘अच्छाई बुराई’ साथ , जाने वाली चीज है ।
‘आचरण’ को साफ रख, मन में ना ‘पाप’ रख । ‘माफ करना’ बड़ा , बनाने वाली चीज़ है ।
‘संस्कार’ छोड़ मत, रस्मों को तोड़ मत । ‘रीति और रिवाज’ भी, ‘निभाने’ वाली चीज हैं ।
‘गाँठ’ मन की खोल ले, बोल ‘मीठे’ बोल ले । ‘झगड़ा  लड़ाई’ तो, ‘मिटाने’ वाली चीज़ हैं ।
‘नेक काम’ कर ले , उसको सुमरले । ‘वक़्त’ लोट कर नहीं , आने वाली चीज़ है ।
थोडा सा ‘नरम’ बन, छोड़ दे ‘क्रोध अगन’ । ‘सब्र’ भी तो सावन, ‘आजमाने’ वाली चीज़ है ।
कवि- “सावन चौहान कारौली” भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534



Ichchha shakti

इच्छा शक्ति


सेना में दम था पहले भी
मगर कहाँ पर कमी रही
इच्छा शक्ति कुछ लोगों की
जाने कहाँ पर जमी रही
सत्ता के लोभी नेता थे
फकत मलाई खाते थे
सेना,सैनिक के साहस को
हर बारी ही गिराते थे
100 रुपये अनुदान मे से भी
90 खुद खा जाते थे
आज कोई आया दमदार तो
पड़ गए खाब खटाई में
सीधे सीधे रेड पड़ी थी
काली जमा कमाई में
सावन चौहान करोली

https://www.writersindia.in/2019/07/fouji-vatan-ki-shan-hai-fouji.html?m=1

भूरा बैल

भूरा बैल

एक बैल की जोड़ी जिसमें, भूरा बैल हमारा था । छोटा सा धरती का टुकड़ा, जो बस मात्र सहारा था ।।
एक छप्पर मिटटी का बना थ, जिसकी छान पुरानी थी । बारिस में बुँदे गिरती थी, आसमान से पानी की । याद मुझे वो दौर ना भूला, कैसे वक़्त गुजारा था ।। एक बैल… रात दिना मेहनत कर के, माँ पापा फसल उगाते थे । काट पिट कर खेत के पैर में, बैलों से उसे गहाते थे , ज्यादा तो बनिया ले जाता, जो बच जाता हमारा था ।। एक बैल… , छ: महीने मुश्किल था निकलना, काम नहीं चल पाता था । लेते ओर किसी से उधार, वो कोई शर्त बताता था । क्या करते पापा बेचारे, और ना कोई चारा था ।। एक बैल…
उपर के खर्चे थे और भी, मात पिता ने था पाला । बीमारी और शादी ब्याह में, सिर्फ सहारा था लाला । सावन वो दिन भी देखा जब, बैल हमारा हारा था ।। एक बैल की जोड़ी …
छोटा सा धरती का टुकड़ा, जो बस मात्र सहारा था ।।
“सावन चौहान कारोली“ एक कलमकार अ0 भा0 सा0परिषद भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534

https://www.writersindia.in/2019/07/chashka-bura-sharab-ka.html