Wednesday, June 26, 2019

कविता - किसका गुमान करे


कविता- किसका गुमान करे

किसका ‘गुमान’ करे ,
काहे ‘अभिमान’ करे ।
‘पैसा और सत्ता’ बंधू ,
आनी जानी चीज है ।

पैसा ना जो कर पाये ,
काम वो ये कर लाए ।
‘मुश्कान छोटी’ बड़े ,
काम की चीज़ है ।

‘सत्य’ का ‘व्यवहार’ कर,
बातें तु विचार कर ।
‘अच्छाई बुराई’ साथ ,
जाने वाली चीज है ।

‘आचरण’ को साफ रख,
मन में ना ‘पाप’ रख ।
‘माफ करना’ बड़ा ,
बनाने वाली चीज़ है ।

‘संस्कार’ छोड़ मत,
रस्मों को तोड़ मत ।
‘रीति और रिवाज’ भी,
‘निभाने’ वाली चीज हैं ।

‘गाँठ’ मन की खोल ले,
बोल ‘मीठे’ बोल ले ।
‘झगड़ा  लड़ाई’ तो,
‘मिटाने’ वाली चीज़ हैं ।

‘नेक काम’ कर ले ,
उसको सुमरले ।
‘वक़्त’ लोट कर नहीं ,
आने वाली चीज़ है ।

थोडा सा ‘नरम’ बन,
छोड़ दे ‘क्रोध अगन’ ।
‘सब्र’ भी तो सावन,
‘आजमाने’ वाली चीज़ है ।

कवि- “सावन चौहान कारौली”
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो.9636931534




2 comments:

Unknown said...

Very nice sir g

geet gajal said...

hridaytal se aabhar aadrniy bhai ji

मेरे हुजरे में कभी आओ अदब का चाँद रखता हूँ होशलों की दीवारें और छान रखता हूँ सेज मखमल की मुनासिब न हो शायद टूटी खटिया है मगर सम्मान ...