Wednesday, August 14, 2019

आगे-आगे लेखनी



आगे आगे लेखनी मैं चला पीछे पीछे-2

लेखनी
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आगे आगे लेखनी मैं चला पीछे पीछे-2
थे कितने निराले जो चित्र इसने खिचे ।।
आगे लेखनी.....

पर्वत पे झुकती घटा काली काली देखी
सिली सिली बरखा की बूंदे रसवाली देखी ।
मिटटी की सोंधी सोंधी खुशबू निराली देखी,
मल्हार गाती एक कोयलया काली देखी ।।
वो झूले पे 'गोरी झूले'अम्बुवा के नीचे ।
आगे आगे लेखनी...

विरहा की पीड़ा और विरहन तड़पती देखी,
देखी मैंने पत्तों पे शबनम सुलगती देखी ।
फूलों से भंवरों के अधर मैंने जलते देखे,
पर्वत को हिलते देखा शिलाएँ पिंघलती देखी ।।
बेनूर देखे भरी रुत में बगीचे ।
आगे आगे लेखनी...

रुसवाई देखी और प्यार भी देखा मैंने,
दगेबाज होता दिलदार  भी देखा मैंने ।
दुश्मन भी देखे और यार भी देखे मैंने,
मतलब का संसार भी देखा मैंने ।।
रिश्ते बिखरते देखे पैसों के पीछे
आगे आगे लेखनी...

पत्थर के मैंने इंसान यहाँ पर देखे,
भले लोगों के गिरेबान यहाँ पर देखे ।
गरीबों की पक्की जुबान भी देखी मैंने,
रईसों के डिगते ईमान यहाँ पर देखे ।।
देखे ऊँची दुकानों पे पकवान फिके
आगे आगे लेखनी...
पैसों के कारण 'सावन' उठते जनाजे देखे,
बड़े बड़े महलों के छोटे दरवाजे देखे,
राजे महाराजे देखे भींख मांगते मैंने
चोरी के माल में दरोगा जी साझे देखे ।।
खाली हाथ जाते देखे सिकन्दर सरीखे
आगे आगे लेखनी...

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सावन चौहान कारौली -एक
कलमकार...
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो.9636931534





Meri Lekhni kalam

लेखनी कलम प्रचंड तेज सूरज सा इसमें । कलम उगलती है शोले ।। दिल की पीर शब्द बन जाती । फिर जो काव्य रंग घोले ।। फूल...