Tuesday, June 18, 2019

aag baras rahi aaj falak se






विनती सुनले हे भगवान


विनती सुनले ऐ भगवान्,
तड़प रहे मजबूर किसान ।

आसमान को नजर ताकती,
सूख चुकी है नमी आँख की,
अबके खाली है खलियान ।

तन ये हुआ पशीना पशीना,
मुश्किल हो गया आज तो जीना ।
ऐसा लगा अब निकली जान ।

ए सी कूलर भूले सांस ,
बारिस ही है अब एक आश ।
अब दे दो बूंदों का दान ।

आग बरस रही आज फलक से,
पानी सुखा जाय हलक से ।
हवा भी आज हुई सुनसान ।

तेरी लीला बड़ी महान,
विनती ली तूने जो मान ,
तू रखता है सब का ध्यान ,
हम सब है तेरी सन्तान ।

हलधर की लोटी मुश्कान,
महक उठे खेत और खलियान ,
सब करते तेरा गुणगान,
शुक्र तेरा हमपे भगवान,
तेरे सहारे ही है चौहान ।


सावन चौहान कारौली...✍एक कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
मो. 9636931534

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