Thursday, June 13, 2019

Shahadat

शहादत

चींख रही है आज "शहादत"

सीमा के रखवालों की ।

आज आत्मा "मौन" हुई क्यों

"पदक" लौटने वालों की ।।

माँत पिता और बीवी बच्चे

मार "दहाडें" रोते है ।

"सैनिक शव" शोलों में झुलसे

टोपी वाले सोते है ।।

टपक रहा है आज "लहू" फिर

 प्यारे ध्वज "तिरंगे" से ।

कब तक बातें करते रहेंगे

"इस" जाहिल भिखमंगे से ।

जिस पर "तांडव" किया उडी में

भारत माँ की छाती है ।

कुत्ता "पागल" हो जाए तो

गोली मारी जाती है ।

 "सत्रह" के सत्रह सौ मारो

फौज को अब आदेश करो ।

 बहुत बह चुका नीर नयन से

अब अश्रू नहीं "आवेश" भरों ।

बाज़ नहीं आएगा "कायर"

 छुप कर जख्म लगाने से ।

घर में घुसकर मारो इसको

ना माने समझाने से ।



 सावन चौहान कारौली

19/09/2016

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