Wednesday, June 12, 2019

HARIYANA

इसा हरियाणा स


एक बिटिया की फ़रमाईश पर आज किया एक नया सृजन हरियाणवी संस्कृति पर विशेष:-

तर्ज- गाडी आले मनै बैठाले  

दूध दही की नदियाँ बहती लहलाहते खलिहान
इसा हरियाणा स
धरती माँ के पूत लाडले,   उपजाते अन्न धान
इसा हरियाणा स

आम नीम पे झूला झूलें जब सामण रुत आवै स
तीज सिंजारे कट्ठी होकै, मेघ मल्हार ये  गावैं स
रंगे बिरंगे दामण पहरैं,   स फेमस परिधान
इसा हरियाणा स

ठाडी बोली मन के सीधे एकदम सीधी बात करैंं
लख्मीचंद की चलै रागनी, रजगा सारी रात करै
मेहर सिंह और मांगे राम हुए सांगी घने सुजान
इसा हरियाणा स
मातृभूमि की सेवा खातेर सबते पहलम तैयार रहवैं
करैं चौकसी सरहद ऊपर जो खाण्डे की धार रहवैं
दुश्मन की छाती कांप्यां करै,  देख के सिंह सी श्यान
इसा हरियाणा स

खेल कूद में रहते आगे, सोने की  बरसात करैं
कुस्ती और कबड्डी खेलैं, दंगल दो दो हाँथ करैं
बॉक्सर हुए बिजेन्दर बरगे जाणें सकल जहान
इसा हरियाणा स

ईश्वर में भरपूर आस्था,  करते टहल बुजुर्गो की
गाँव के भोले भाले माणश राखै कद्र तजुर्बों की
इनकी सेवा भाव का कायल, ये *सावन चैहान
इसा हरियाणा स

"सावन चौहान कारोली " - एक साधक
भिवाड़ी अलवर राजस्थान
14-09-2017


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