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मेरे हुजरे में कभी आओ
अदब का चाँद रखता हूँ

होशलों की दीवारें
और छान रखता हूँ

सेज मखमल की मुनासिब न हो शायद
टूटी खटिया है मगर सम्मान रखता हूँ

हक किसी मजलूम का खाता नहीं मैं
चटनी रोटी में मगर ईमान रखता हूँ

न मिले पकवान शायद महलों से....

Sawan
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Mere jiwan ka kona

मेरे जीवन का कोना

इस कोने में भाव भतेरे इस कोने में छुपे सवेरे
इस कोने में चाँद औ सूरज इस कोने के हँसी नजारे
इस कोने में बैठ भवानी बुनती है नित नई कहानी
ये कोना उदगार तोलता ये कोना हृदय द्वार खोलता
इस कोने में सपने सजते इस कोने में मौन बोलता
ये कोना एक चित्र उकेरे इस कोने में रंग घनेरे
ये कोना जादू की गठरी इस कोने की बातें वखरी
इस कोने में ठाव कई हैं सफर बहुत ठहराव कई हैं
ये कोना सुख दुःख है समेटे ये कोना हर विदना मेटे
इस कोने में बहती नदियाँ इस कोने में चलती नोका
इस कोने में ज्वार उमड़ता इस कोने में अमृत झड़ता
इस कोने में गिरते झरने इस कोने से निकले किरणें
ये कोना है मीत हमारा इस कोने सा कौन है प्यारा
Writer-sawan chauhan karoli       Date- २३ October 2019 https://www.writersindia.in/2019/06/blog-post_23.html?m=1

Meri Lekhni kalam

लेखनीकलम
प्रचंड तेज सूरज सा इसमें । कलम उगलती है शोले ।। दिल की पीर शब्द बन जाती । फिर जो काव्य रंग घोले ।।
फूलों सी नाजुक भी है ये । तेज कलम शमसीरों से ।। अंगारे भी लिखती है ये । अनमोल शब्द भी हीरों से ।।
उठे क्रान्ति जब चलती है । इंकलाब का नाद उठे ।। जब जब चले, जले दीपक सी । अन्धकार का नाम मिठे ।।
कड़वी मीठी दोनों जाने । नहीं डरे सच कहने से ।। कही शस्त्र बनती तनती है । कही ये सजती गहनों से ।।
दर्द लिखे ये जख्मी दिल का । आँखों की लिखती भाषा ।। कभी लिखे तन्हाई मन की । कभी लिखे ये अभिलाषा ।।
कभी प्रेम रस कभी वीर रस । विरह लिखे ये विरहन की।। देश प्रेम जब जब लिखती है। छाती कांपे दुश्मन की ।।
लू लिखे ये जेष्ठ मॉस की । लिखे फुवारे सावन की ।। ठिठुरन लिखती है सर्दी की। लिखे बहारें योवन की ।।
गीत फ़ाग के प्यारे लिखती। और बौछारें रंगों की ।। लिखे वीरता रणवीरों की ।

आगे-आगे लेखनी

आगे आगे लेखनी मैं चला पीछे पीछे-2
लेखनी *******************************
आगे आगे लेखनी मैं चला पीछे पीछे-2 थे कितने निराले जो चित्र इसने खिचे ।। आगे लेखनी.....
पर्वत पे झुकती घटा काली काली देखी सिली सिली बरखा की बूंदे रसवाली देखी । मिटटी की सोंधी सोंधी खुशबू निराली देखी, मल्हार गाती एक कोयलया काली देखी ।। वो झूले पे 'गोरी झूले'अम्बुवा के नीचे । आगे आगे लेखनी...
विरहा की पीड़ा और विरहन तड़पती देखी, देखी मैंने पत्तों पे शबनम सुलगती देखी । फूलों से भंवरों के अधर मैंने जलते देखे, पर्वत को हिलते देखा शिलाएँ पिंघलती देखी ।। बेनूर देखे भरी रुत में बगीचे । आगे आगे लेखनी...
रुसवाई देखी और प्यार भी देखा मैंने, दगेबाज होता दिलदार  भी देखा मैंने । दुश्मन भी देखे और यार भी देखे मैंने, मतलब का संसार भी देखा मैंने ।। रिश्ते बिखरते देखे पैसों के पीछे आगे आगे लेखनी...
पत्थर के मैंने इंसान यहाँ पर देखे, भले लोगों के गिरेबान यहाँ पर देखे । गरीबों की पक्की जुबान भी देखी मैंने, रईसों के डिगते ईमान यहाँ पर देखे ।। देखे ऊँची दुकानों पे पकवान फिके आगे आगे लेखनी... पैसों के कारण 'सावन' उठते जनाजे देखे, बड़े बड़े महलों के छोटे …

Naqaab rukh se

Naqaab rukh se
नकाब रुख से
काफ़िया- बिगाड़ रदीफ़- देती है
1212 1122 1212 22
नकाब रुख से वो जब भी, उघाड़ देती है। बड़े बड़ों की शराफत, बिगाड़ देती है।।
कमाल हुश्न नवाजा है उसको मालिक ने ईमान वालों की नीयत बिगाड़ देती है
रहे न दरमियां दूरी खुदा दिवानों के जुदाई इश्क में हालत बिगाड़ देती है
रईसजादों के पहलू में होश में रहना रईसजादों की आदत बिगाड़ देती है
गलत लोगों से करीबी नहीं होती अच्छी सरीफजादों को सोहबत बिगाड़ देती है
शराब ठीक नहीं रोज भी पीना "सावन" लगे जो लत तो ये इज्जत बिगाड़ देती है

सावन चौहान कारोली- गजलकार भिवाड़ी अलवर राजस्थान
https://www.writersindia.in/2019/07/blog-post_2.html?m=1

Ichchha shakti

इच्छा शक्ति


सेना में दम था पहले भी
मगर कहाँ पर कमी रही
इच्छा शक्ति कुछ लोगों की
जाने कहाँ पर जमी रही
सत्ता के लोभी नेता थे
फकत मलाई खाते थे
सेना,सैनिक के साहस को
हर बारी ही गिराते थे
100 रुपये अनुदान मे से भी
90 खुद खा जाते थे
आज कोई आया दमदार तो
पड़ गए खाब खटाई में
सीधे सीधे रेड पड़ी थी
काली जमा कमाई में
सावन चौहान करोली

https://www.writersindia.in/2019/07/fouji-vatan-ki-shan-hai-fouji.html?m=1

Ped lagao punya milega

पेड़ लगाओ पुन्य मिलेगा
पेड़ लगाओ पूण्य मिलेगा पेड़ धरा का है गहना अंतिम एक उपाय यही है गर जीवित भी हैं रहना
काट रहे हो वृक्ष देव को आरी और कुल्हाड़ी से क्यों तुम पहियें तोड़ रहे हो कुदरत की इस गाडी के यूँ ही कटाई चलती रही तो बाढ़-अकाल पड़े सहना अंतिम एक उपाय यही… पेड़ लगाओ पूण्य...
जीवन भर देते ही है ये हमें फूल फल और मेवा बदले में कभी कुछ ना मांगते ये ही तो हैं भोले देवा कुदरत का वरदान वृक्ष है तोता से बोली मैना अंतिम एक उपाय... पेड़ लगाओ पूण्य…
जो देते हैं हमको जीवन उनका छीन रहे जीवन कैसे बारिश होगी यहाँ पे धरा पे गर ना बचे ये वन बिन हरियाली खुशहाली ना दादा दादी का कहना अंतिम एक उपा… पेड़ लगाओ पूण्य…
गर धरती से प्यार है हम को हम भी पेड़ लगाएँगे हम भी लाल हैं इस धरती के सुंदर इसे बनाएंगे आज से अपने मन मे सावन ये निश्चय तुम कर लेना अंतिम एक उपाय… पेड़ लगाओ पूण्य...
सावन चौहान कारौली -एक नादान कलमकार भिवाड़ी अलवर राजस्थान मो.9636931534
https://www.writersindia.in/2019/07/save-water-save-future.html